Chhatarpur district से लगभग 32 km दूर panna road highway पर डांग है और वहां से 4 km दूर एक छोटा सा गांव है जिसका नाम है गड़ा और उसी गांव में स्थित है प्राचीन और बहुत ही प्रसिद्ध हनुमान जी का मंदिर ।

जाने के विकल्प:-

आपको छतरपुर के लिए बस या रेलवे ट्रेन से जाना होगा चाहे जहां भी आप रहते हैं । Aeroplane से आने पर आपको खजुराहो एयरपोर्ट पर उतरना होगा। वहां से आपको डांग के लिये personal cab या auto बुक करनी  होगी जो आपको गढ़ा गांव में छोड़ेगी । गढ़ा गांव में ही बागेश्वर धाम स्थित है।

बागेश्वर धाम में रहने की व्यवस्था

बाघेश्वर धाम में आपको रहने के लिए कई धर्मशाला मिल जाएंगे जहां पर आप रुक सकते हैं। खाने के लिए आपको बागेश्वर धाम मैं सुबह 10:00 बजे और रात को 8:00 बजे भोजन प्रसाद मिलता है। यदि आप किसी होटल में रुकना चाहते हैं तो आप बागेश्वर धाम से लगभग 30 km  दूर स्थित खजुराहो में किसी भी होटल में रुक सकते हैं।

यह हनुमान मंदिर चमत्कारी स्थान के रूप में काफी प्रचलित हो गया है। राम भक्तों का कहना है कि यहां दर्शन और परिक्रमा करने मात्र से लोगों के बिगड़े काम पूरे जाते हैं। पिछले 9  वर्षों से यहाँ हजारों श्रद्धालु आते हैं और अपने बिगड़े काम काम ऊपरी हवा, बिघ्न बाधा और भूत-प्रेत के चक्कर आदि से निजात पाते हैं।  बड़ी से बड़ी समस्या का निवारण प्रभु के दर्शन और महाराज जी की कृपा मात्र से ही हो जाता है।कई  साल पुराने इस मंदिर का निर्माण सन 1887 में बाबा श्री सेतु लाल गर्ग ने कराया था। श्री बागेश्वर धाम सरकार के दर्शन करने के बाद कम से कम 40 दिन तक लहसुन, प्याज, मीट, मांस, शराब का सेवन पूरी तरह बंद करना होता है, ऐसी यहाँ की मान्यता है। भारत के कोने- कोने से हजारों की संख्या में भक्त पहुंचकर पूजा, अर्चना और परिक्रमा करते हैं।

9 वर्ष की उम्र से श्री धीरेंद्र कृष्ण जी महाराज यहाँ हनुमान जी की भक्ति करते हैं और वह बागेश्वर धाम सरकार (Bageshwar Dham Sarkar) की सेवा में लगे हुए हैं। उनकी निष्ठा को देखकर  भगवान की ऐसी कृपा हुई कि वह बाल्यावस्था या कहें की बहुत छोटे से ही लोगों के दुःख-दर्द को को दूर करने लगे थे। उनपर हनुमान जी महाराज की ऐसी कृपा हुई कि इस धाम के दर्शन के लिए देश के कोने- कोने से लोग आते हैं। लगभग 9 वर्ष से श्री बागेश्वर धाम सरकार (Bageshwar Dham Sarkar) सिद्धपीठ में मंगलवार को पेशी लगाकर हनुमान जी की कृपा से  लोगों के दुख दूर कर रहे हैं। श्री धीरेंद्र कृष्ण जी का कहना है जो प्रभु का आदेश होता है हम उसी तरह से लोगों के दुख दूर करने में सहयोग करते हैं।

Bageshwar Dham Sarkar Darbar Biography

नाम – धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी
जन्म – 4 july 1996
आयु -25 वर्ष
जन्म स्थान -ग्राम गढ़ा ,छतरपुर ,मध्य प्रदेश
पिता का नाम -श्री राम करपाल गर्ग
माता का नाम – सरोज गर्ग
भाई-बहन- 1 भाई 1 बहन
पेशा – अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक
महाराज जी का जन्म 4 जुलाई 1996 को छतरपुर जिले के ग्राम गढ़ा में सरयुपारीय ब्राह्मण में हुआ.
फ़ोन नंबर +91 8800330912

दोस्तों आगे हम बागेश्वर धाम के प्रमुख महाराज श्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी के जीवन के बारे मे जानेंगे। जैसे कि वो कोन हैं, कहाँ रहते हैं, क्या करते हैं, उनका जीवन कैसा रहा,कैसे वो बागेश्वर धाम पहुँचे, आदि तो आप लोग अंत तक इस पोस्ट को जरूर पढ़िए ।

जब धीरेन्द्र कृष्ण के दादा जी थे, तो वो भी यहीं बैठते थे। उनके पहले एक और संत थे जो यहाँ रहते थे। 3 पीढ़ी से यहाँ बालाजी धाम के दरबार चला आ रहा हैं। यहाँ देश विदेश के भक्त सभी लोग आते है, और अपनी अर्जी लगाते हैं। बालाजी उन सब पर कृपा करते हैं। यहाँ के दरवार से कभी कोई खाली हाथ नही गया है, यहाँ सबपर कृपा चली आ रही है।

बागेश्वर बालाजी महाराज ने धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी को दूसरी पीढ़ी में कृपा पात्र बनाया।  9 वर्ष की आयु से बालाजी के चरण में रहकर बालाजी महाराज की सेवा की। बालाजी ने जो कुछ मार्गदर्शन दिखाया, गुरूजी ने जैसा मार्गदर्शन दिखाया जो जो बताया उसी नियम का पालन महाराज ने किया उनके चरणों की दया से आज उनकी जो कृपा हैं , संपूर्ण भारत के लोग यहाँ आते हैं और मनो कामना की अर्जी लगाते हैं | बागेश्वर बालाजी महाराज सब पर कृपा करते हैं |

प्रारंभिक स्थिति :-

धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी एक पंडित हैं। वो भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। उनकी प्रारंभ में बहुत दुःखद स्थितियाँ आई उनके  पिता जी कुछ नहीं करते थे और नशे के भी आदी थे तथा घर पर ही रहते थे। ये दो भाई और एक बहिन हैं, घर में सबसे बड़े धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी यानी कि अपने महाराज जी ही थे और वे गाँव में भिक्षा मांगकर परिवार चलाते थे | सत्यनारायण की कथा वाचन कर , अमावस्या को पोथी बांचकर, परिवार चलाते थे | बागेश्वर धाम पर उनके दादा जी रहते थे | और वे यहाँ की कोई भी आने वाली चढ़ोत्तरी को निजी जीवन में उपयोग नहीं करते हैं।

इसलिए इस धाम की बड़ी महिमा है | जब तो देश विदेश के लोग यहाँ आतें है | इसलिए बालाजी सभी लोगों पर कृपा करते हैं | कोई भी यहाँ से खाली नहीं जाता है | उनकी चरणों की दया से सब कुछ चलता है | बहुत भाव में जीवन जुड़ा जब राम दया हुईं, बागेश्वर बालाजी की दया हुईं इसलिए भगवद् कृपा से भोजन पानी चल रहा है | जीवन भर उनकी सेवा करना है |  जब तक राम भक्ति नही, जीवन में नर मानव के तन में सबकुछ का अभाव है | और जिस दिन राम भक्ति आ गई प्रभु का प्रभाव हो गया

महाराज धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी की शिक्षा :

शिक्षा दीक्षा दादाजी के चरणों से शुरू हुई थी | यहाँ बागेश्वर धाम पर अधिक रहे | स्कूल भी जाते रहे, महीना दो चार महीना  | सेवा ज्यादा करनी पड़ती थी | दादाजी की सत्यनारायण की कथा वाचने जाना कहीं, रामायण वाचने जाना कही, पुराण वाचने जाना कहीं, शिक्षा दीक्षा आठवीं तक गाँव में की | आठवीं के बाद यहाँ स्कूल नहीं था | अतः पांच km पैदल जाते थे |  12 वीं तक पढ़ाई की इसके बाद महाराज ने बी.ए. प्राइवेट किया ,और बालाजी महाराज की कृपा से उन्होंने इसे पार भी कर लिया | बालाजी की कृपा से 9 वीं से 12 वीं तक गंज में पढ़ाई की इसके बाद वे बहुत ज्यादा सेवा में और मानव सेवा में लग गए |

महाराज धीरेन्द्र की भगवद् कथा अध्ययन : बागेश्वर धाम

महाराज जी के वचन :-
सबसे पहली गुरु हमारी माता जी है जो शुरू से रामायण गीता पढवाती थी वह पढ़ी लिखी नही थी मगर रामायण सुनती जरुर थी पहला आदेश माँ का ही था. दादा जी श्री श्री 1008 पंडित श्री भगवान दास गर्ग जी महाराज थे ।  हमारे महाराज ने सनातन सस्कृति का बीड़ा उठाया है जो बालाजी की कृपा से अब चल रहा है ।.उन्होंने वैदिक गुरुकुल की स्थापना भी करने का संकल्प लिया है । जिससे गुरूजी कहते है भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार हो.  इस प्रकार से संस्कृत को बढाने का भी संकल्प लिया है हमारे  महाराज जी ने।

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भगवत कथा का अध्ययन दादा गुरू ने करवाया | यहाँ दरबार की महिमा हमेशा से ही रही है और बालाजी धाम पर अच्छे अच्छे वैज्ञानिक आते रहे हैं | कलयुग के युग में कोई बिना बताए किसी के मन की बात या परेशानी नहीं जान सकता है | पर हमारे महाराज बालाजी की कृपा से किसी के भी मन्न की बात जान लेते हैं ।उन्होंने कहा कि बागेश्वर बालाजी हमारे दादा जी की महिमा है |

दादा जी के चरणों की कृपा है | वो विद्वान भी थे, शास्त्री भी थे , संस्कृत भी पढ़ते थे, पुराण भी पढ़ते थे |दादा जी बहुत बड़े महापुरुष थे | उनके चरणों में बैठकर शास्त्री जी ने भगवद् सीखी ,  रामायण सीखी  उन्हीं से दरबार की विधि भी जानी| नौ साल से लाठी लेकर मारने लगे थे |

महाराज कहते हैं कि बड़ी बात यही है कि जब तक जीवन में गुरू नहीं है | जीवन अंधकारमय है |
गुरू कृपा से ये शरीर बैठा है ।

यहां पर उन्हीं लोगों की समस्या का निवारण होता है जिनके पास टोकन होता है। बिना टोकन का महाराज जी किसी को भी मुलाकात नहीं देते हैं। जिन जिन लोगों के पास टोकन होता है उन लोगों का ही नंबर लगता है और उनका समस्या सुना जाता है।

टोकन कैसे मिलेगा ? Bageshwar Dham Tokan क्या है?

बागेश्वर धाम में धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी से मिलने के लिए टोकन जारी किए जाते हैं.बागेश्वर धाम में वहा के कर्मचारियों द्वारा काउंटर से मुफ्त में टोकन ऐसे लोगों को दिए जाते हैं जो बागेश्वर धाम में अपनी अर्जी देना चाहते हैं बागेश्वर धाम की इस टोकन मैं आपको अपना नाम अपना स्थान अपना मोबाइल नंबर जानकारी भरनी होती है. टोकन भी किसी विशेष दिन दिए जाते है आप पहले Bageshwar Dham youtube चैनल में दिए मोबाइल नंबर से भी संपर्क कर सकते है.

बाद में जब आपका नंबर आता है तो आपको कॉल किया जाता है । बरकन लेने के लिए आपको यहां पर लाइन में लगने की जरूरत नहीं है। हर माह में किसी एक विशेष तारीख को टोकन नंबर दिया जाता है। आपको घर बैठे बागेश्वर धाम के ऑफिशियल नंबर पर फोन करना पड़ेगा और जिस दिन टोकन के लिए लाइन लगेगा उस दिन आपको आकर लाइन में लगना होगा। टोकन मिलने के बाद ही अर्जी लगता है। अर्जी के लिए जो दिन और तारीख दिया जाएगा उस दिन और तारीख को बागेश्वर धाम आपको पहुंचना होगा।

उसके बाद टोकन के हिसाब से महाराज जी से मुलाकात होती है और समस्याओं का समाधान किया जाता है। अधिक लोगों के आने की वजह से टोकन नंबर की व्यवस्था की गई है जो पूर्णतः निःशुल्क है। बागेश्वर धाम में अर्जी लगाना निःशुल्क है, पूज्य महाराज श्री से मिलना निःशुल्क है, मार्गदर्शन लेना भी निःशुल्क है, आशीर्वाद लेना भी निःशुल्क है, धाम पर ठहरना निःशुल्क है एवं अनवरत चल रहे भंडारा में प्रसाद पाना भी निःशुल्क है।

महाराज जी के वचन :-
भगवान की परीक्षा आदिकाल से होती है | दरबार में संतों की परीक्षा आदिकाल से होती आई है | बागेश्वर भगवान की कोई परीक्षा नहीं ले सकता है | कोशिश भर बालाजी जितनी प्रेरणा देते हैं उतनी में लिख देता हूँ | आज तक यहाँ से कोई असंतुष्ट नहीं गया | वाकी रावण के खानदान कभी संतुष्ट नहीं हो सकते | बालाजी ऊपर से तक उतर आएं | कोई उपाय नहीं है | जब जिसको नहीं मानना है उसको कैसे विश्वास दिलाएँ, ऐसे जग में बहुत से लोग है | उनमें अपना समय बर्बाद नहीं कर सकते हैं |
महाराज जी के वचन :-

इसमें हम ज्यादा नहीं पड़ते हैं | कोई आ जाए तो मना नही करते हैं | कोई माइक ले के आ जाए, कोई मोबाइल ले के आ जाए, कई पत्रकार आए देश विदेश से किसी को मैंने मना नही किया |

इसका जवाब विज्ञान और परा विज्ञान, परा विज्ञान भगवान है |विज्ञान और परा विज्ञान दोनों एक दूसरे के पूरक है | 40 साल से दरबार चल रहा है , ये भी बहुत बड़ा विषय है | बागेश्वर धाम पर ये समय पूर्ववती रहा है | दादा जी के पास जो भी धन दान के रूप में आता था तो वो भंडारा कर देते थे | अब यहाँ भीड़ ज्यादा बढ़ने लगी थी तो धन भी बहुत आ जाता था | दादा गुरू जी से पूछा इसका क्या करेगें | आगे चलकर निजी जीवन में यहाँ की राशि नहीं ली जाती है, ऐसा धाम है |

अर्जी निशुल्क, दरबार निशुल्क, मिलना निशुल्क, भंडारा निशुल्क, रूकना निशुल्क, सब कुछ निशुल्क है | जब भीड़ ज्यादा आने लगी सबके ऊपर बालाजी महाराज कृपा करते रहे | किसी का कैंसर ठीक हो गया, किसी की नौकरी लग गई है | वो लोग एक दो महीने की वेतन दे जाते हैं | हमने सोचा ज्यादा पैसे हो जाएगें तो क्या करेगें | तो विचार किया गरीब कन्याओं का विवाह करवा दिया जाए, डेढ़ साल पहले संकल्प लिया | जो चढ़ोत्तरी है उनसे गरीब कन्याओं का विवाह किया जाएगा | बालाजी की कृपा से 50 से 60 विवाह संपन्न कर दिए है | और जब तक तन में प्राण रहेगें बालाजी की कृपा से ऐसे ही समाज सेवा में लगे रहेंगे |

पहले परिवार की स्थिति बहुत ही कमजोर थी परंतु श्री बागेश्वर धाम महाराज ने बहुत अधिक संघर्ष किया और बाद में श्री हनुमान जी के आशीर्वाद से आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं, जहां अब उनकी पूजा देश विदेश में होने लगी है। बागेश्वर धाम सरकार ने कुछ अपने निजी जीवन के संघर्ष के बारे में बताया उन्होंने कहा की मैं ही अपने परिवार में सबसे बड़ा था और परिवार का भरण पोषण मुझे ही करना होता था जिसके चलते  लोगों के घरों में जाकर के दान दक्षिणा मांगा करते थे और कथा पूजा इत्यादि से अपने घर पर भरण पोषण करते थे।

यहाँ की ऐसी मान्यता है की यहाँ पर 40000 शक्तियां भक्तों की निगरानी करती  हैं। ऐसी आस्था है कि इस धाम में मंदिर के आसपास हनुमान जी की 46000 सेना चारों और घूमती रहती हैं और दुःखी लोगों के मन की बात गुरुजी धीरेंद्र कृष्ण जी के कानों तक पहुंचा देती हैं। और धीरेंद्र जी उनकी समस्या को भक्तों के बताने से पहले ही एक पेपर पर लिख देते हैं। फिर उसका निवारण करने के लिए पेशी वाले हाल में बुलाते हैं। श्री धीरेंद्र कृष्ण जी का कहना है यदि भक्त ने पूरी श्रद्धा के साथ  हनुमानजी की उपासना की है तो 100% उसकी समस्या का निवारण हो जाता है। 

पेशी के लिए अलग से टोकन की निशुल्क व्यवस्था की गई है।इस धाम में किसी प्रकार का कोई फीस नहीं ली जाती है। यहाँ गरीब अमीर सभी का नंबर बाई नंबर पेशी होती है और उनकी समस्या के निराकरण होता है। श्री धीरेंद्र कृष्ण जी कहते हैं कि बागेश्वर धाम सरकार (Bageshwar Dham Sarkar) में जितना भी दान-दक्षिणा आता है उसी से रोजाना मां अन्नपूर्णा महाप्रसाद का भंडारा होता है और यहां आने वाले हर भक्त के लिए भंडारा करवाया जाता है।

इसी दान से गरीब कन्याओं का विवाह भी कराया जाता है। देवेंद्र कृष्ण जी का कहना है कि जिन बुजुर्गों को रहने और खाने का कोई आसरा न हो वह बागेश्वर धाम (Bageshwar Dham Sarkar) के आश्रम में आकर यहाँ रह सकते हैं। बुजुर्ग लोगों के लिए अलग से रहने की व्यवस्था भी की गयी है। जब तक हमारा जीवन है तब तक गरीब कन्याओं और बृद्ध-बुजुर्ग लोगों की सेवा करते रहेंगे यह हमें हनुमान जी से प्रेरणा मिली है।

कई युगों में होते हैं ऐसे महापुरुष : बागेश्वर धाम महाराज आज के इस युग में इस तरह के संत सिद्ध पुरुष  बहुत ही कम देखने को मिलते हैं, उनसे पहले उनकी जो दादाजी थे, वह भी इसी तरह से दरबार लगाया करते थे आज उनकी समाधि उसी मंदिर के पास स्थित है, वही बागेश्वर धाम महाराज के गुरु थे उन्हीं के सानिध्य में रहकर उन्होंने यह सब प्राप्त किया है और श्री बालाजी हनुमान की कृपा दृष्टि उन पर हुई।

सावधान: Bageshwar Dham Sarkar के नाम से बनाए हुए फर्जी ग्रुप से.

अभी कुछ समय से देखा जा रहा है की बहुत से लोग बागेश्वर धाम सरकार नाम से बहुत से फेसबुक ग्रुप बना रहे है. तथा पैसो की मांग भी करते है हम आपको बता रहे है की Bageshwar Dham Sarkar पुर्णतः निशुल्क है वहाँ कोई भी पैसो की मांग नहीं की जाती है अर्जी भी फ्री में लगाईं जाती है. अतः ऐसे लोगो से बचें जो Bageshwar Dham Sarkar महराज जी से मिलवाने के नाम से पैसो की मांग कर रहे है.

भारत का पहला तीर्थ जहा दरबार निशुल्क है, भंडारा निशुल्क है, और और प्रत्येक समाज को सनातन धर्म से जोड़ने के लिए आने वाली संपूर्ण चड़ोत्री से गरीब कन्याओं का विवाह करवाया जाता है! बिना बताए पूर्ववत ही आपकी समस्या को पर्चे पर कलमबध्य करके लिखकर रख दिया जाता! जो आज के युग में अद्भुत है अद्भुत शक्ति पूज्य गुरुदेव की तीन पीढ़ियों से चल रही बागेश्वर बालाजी की का दरबार और आपके होने वाले जीवन में क्या क्या होगा उसका विस्तार पूर्व समस्या का समाधान प्राप्त होता है!

स्वयंभू हनुमान जी का दिव्य दरबार है साक्षात बालाजी विराजमान है जहां दर्शन करने मात्र से ही कल्याण होता है लाखों भक्त प्रति महीना बागेश्वर बालाजी के दरबार में पहुंचते हैं बागेश्वर धाम का पता है बागेश्वर धाम सिद्ध पीठ आश्रम गड़ागंज जिला छतरपुर मध्य प्रदेश तो दोस्तों ये है बागेश्वर धाम प्रमुख महाराज धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी की जीवनी, महाराज जी की जीवनी को पढ़कर आपको कैसा लगा कमेंट में अपनी राय जरूर दें | जय बागेश्वर धाम की जय सद्गुरु भगवान सन्यासी बाबा की जय बागेश्वर धाम सिद्धपीठ आश्रम पर बागेश्वर बालाजी का दरबार लगता है जहां पर होती है सभी मनोकामनाएं पूर्ण !

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